मशरुम उत्पादन, मछली व मुर्गी पालन के अभिनव प्रयास सराहनीय: डा० जितेन्द्र
फतेहपुर, शमशाद खान । हस्वा विकास खण्ड के ग्राम रघुनाथपुर में एक ही जगह मशरुम उत्पादन व्यवसाय के रुप में कर रहे जयपाल के अभिनव प्रयास को देखने के लिए कृषि वैज्ञानिक डा0 जितेन्द्र सिंह खेत पहुंचे। जहां उन्होने देखा कि 10 शेडों में मशरुम का उत्पादन किया जा रहा है। बटन मशरूम की खेती कर रहे जयपाल ने बताया कि मशरुम की खेती का कार्य 3-4 वर्ष से कर रहे हैं। यहा पर अभी प्रारम्भ किया हैं।
![]() |
| निरीक्षण करते कृषि वैज्ञानिक डा0 जितेन्द्र सिंह। |
कृषि वैज्ञानिक डा० जितेन्द्र सिंह ने सलाह दिया कि रघुनाथपुर गांव के आसपास के गाँवों में नवयुवकों को जोड़कर एक मशरुम उत्पादक समूह बनाकर खेती करना लाभकारी होगा। मछली पालन, मुर्गी पालन की भी तैयारी पूर्ण है। कृषक जयपाल, रामकिशोर पाल जो माडल तैयार कर रहे है उसको और अधिक क्षेत्र में गावांे में विस्तार कर क्लस्टर बनाने की सलाह दिया। कोई भी खेती एवं मशरुम उत्पादन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी आदि जब एक साथ कई कृषक मिलकर करते हैं तो लागत कम और लाभ अधिक होता हैं। कृषक जयपाल व राम किशोर ने कहा कि 2 माह में मशरुम, मछली, मुर्गी पालन के इतने अच्छे से माडल तैयार करेगे कि कुलपति हमारे कार्य को भी देखने आयें। चन्द्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डा० डीआर सिंह के गाँव, खेत मे भ्रमण करने का प्रभाव है कि कृषको में एक भावना जगी है कि हम भी अच्छा करेगे तो कुलपति आएंगे। जिससे कार्य का महत्व बढ़ेगा और हम अपने काम से अधिक लाभ कमाने के प्रबन्धन से जुड पायेंगे। कृषकों ने कुलपति के भ्रमण व किसानों से जुडने की सोच को कृषको ने कई बार अपने विचार में कृषक हित व चिन्तन बताया।

No comments